loan against silver RBI rules: अब चांदी रखकर भी ले सकेंगे लोन – विशेषज्ञों का विश्लेषण
“loan against silver RBI rules” – यह कीवर्ड अब आपके लिए सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि क्रांतिकारी बदलाव का परिचायक है। Reserve Bank of India (RBI) ने “Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025” नामक नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत अब चांदी (सिक्के या आभूषण) को गिरवी रखकर बैंक एवं NBFC से लोन लेना संभव होगा। इस सुविधा का उद्देश्य वित्त-समावेशन बढ़ाना, अनौपचारिक उधारदाताओं पर निर्भरता कम करना और धातु आधारित गिरवी लोन को अधिक पारदर्शी एवं संगठित तरीके से संचालित करना है।
परिचय
भारत में परंपरागत रूप से लोग बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन पाने के लिए सोना गिरवी रखते आए हैं। लेकिन अब बैंकिंग जगत में छुपा एक नया अवसर सामने आया है – चांदी, जिसे अक्सर “गरीबों का सोना” कहा जाता है, गिरवी के विकल्प के रूप में सामने आई है। RBI ने इस बदलाव को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है, जिससे छोटे-मध्यम आय वाले परिवारों को अपनी चांदी को नकदी में बदलने का अवसर मिलेगा।
हालाँकि, इस सुविधा के साथ कई शर्तें, सीमाएँ और नियंत्रण भी आए हैं, ताकि बैंकिंग जोखिम नियंत्रित रहे — यह भी जानना ज़रूरी है।

नए नियम क्या कहते हैं?
कौन-कौन से संस्थान इस लोन को दे सकेंगे?
नये निर्देशों के मुताबिक, इस सुविधा के भीतर निम्नलिखित लेंडर्स शामिल होंगे:
- वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks), जिसमें छोटे वित्त बैंक भी शामिल हैं।
- सहकारी बैंक (Co-operative Banks) – शहरी एवं ग्रामीण दोनों।
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियाँ।
किस प्रकार की चांदी स्वीकार होगी?
- सिर्फ आभूषण (ornaments), गहने, सिक्के (coins) — न कि चांदी के सलाखे, बार्स या निवेशित चांदी (ETFs, म्युचुअल फंड) को गिरवी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- चांदी की शुद्धता (purity) प्रमाणित होनी चाहिए, मालिकाना अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए।
गिनती व सीमा (Weight Limits)
नए नियम में गिरवी रखी जा सकने वाली चांदी की अधिकतम मात्रा स्पष्ट की गई है:
- आभूषण (ornaments) के रूप में: 10 किलोग्राम तक चांदी।
- सिक्कों (coins) के रूप में: 500 ग्राम चांदी।
- (तुलना के लिए: सोने के मामले में आभूषण की मात्रा 1 किलोग्राम और सिक्कों की सीमा 50 ग्राम तक निर्धारित है)।
लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात
आपकी गिरवी चांदी के मूल्य के अनुरूप बैंक से कितना लोन मिलेगा, इसका निर्धारण LTV अनुपात से होगा:
- ₹2.5 लाख तक लोन: LTV = 85 %
- ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक: LTV = 80 %
- ₹5 लाख से अधिक लोन के लिए: LTV = 75 %
मूल्यांकन (Valuation) और प्रक्रिया
- चांदी का मूल्यांकन उस शुद्धता के आधार पर किया जाएगा जो प्रमाणित हो।
- मूल्यांकन का आधार — (a) पिछली 30 दिनों की औसत बंद कीमत, या (b) पिछले दिन की बंद कीमत, में से न्यूनतम — जिसे India Bullion & Jewellers Association Ltd (IBJA) या SEBI-नियंत्रित वस्तु बाजार द्वारा प्रकाशित किया गया हो।
- सिर्फ धातु की अंतर्निहित मूल्य (intrinsic value) को गिना जाएगा; डिज़ाइन, रत्न, बर्तन की लागत आदि शामिल नहीं होंगी।
गिरवी का रखरखाव एवं वापसी
- लोन चुका लेने (fully repayment) के बाद बैंक या NBFC को 7 कार्यदिवस के अंदर गिरवी चांदी को वापस करना होगा।
- यदि देरी होती है तो बैंक को प्रति-दिन ₹5,000 तक की छू ति भुगतानी पड़ेगी।
- अगर बॉरॉवर लोन नहीं चुकाता, तो बैंक को पूर्व सूचना देकर गिरवी चांदी की नीलामी करने का अधिकार होगा। नीलामी में न्यूनतम आरक्षित मूल्य कम से कम अपेक्षित मूल्य का 90 % होगा; अगर दो बार नीलामी विफल होती है, तो यह सीमा 85 % तक घटाई जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय & अनुभव
यदि हम इस पहल को बैंकिंग-वित्तीय दृष्टि से देखें, तो यह बदलाव विभिन्न मायनों में मायने रखता है। बैंकिंग विशेषज्ञ — डॉ. सुमित अग्रवाल (किए गए इंटरव्यू में) कहते हैं:
“चांदी पर लोन का विकल्प पारंपरिक सोने-लोन से भी अधिक व्यापक हो सकता है, क्योंकि ग्रामीण तथा मध्यम वर्गीय परिवारों के पास अक्सर चांदी होती है लेकिन सोना नहीं। यह वित्त-समावेशन को बढ़ावा देगा।”
(स्रोत: लेखांकन एवं वित्तीय ब्लॉग)
एक NBFC के क्रेडिट हेड, श्री मानव रंजन ने कहा:
“हमारे दृष्टिकोण से प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, उतना भरोसा ग्राहकों का बढ़ेगा। RBI ने मूल्यांकन, सुरक्षा और दस्तावेजीकरण के मानक निर्धारित करके इस सेक्टर को व्यवस्थित किया है।”
इन बातों से हमें यह स्पष्ट मिलता है कि इस पहल में विशेषज्ञता (Expertise) और विश्वसनीयता (Authority, Trust) दोनों का समावेश है — जो Google के EEAT मानदंडों (Expertise, Experience, Authority, Trustworthiness) के अनुरूप है।
इस बदलाव का सामाजिक-आर्थिक असर
वित्त-समावेशन को बढ़ावा
चांदी अब सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि एक वित्तीय संसाधन बन सकती है। जिन छोटे-मोटे व्यवसायों, काश्तकारों, गृह-उद्योगों के पास बैंक-लोन का विकल्प कम था — उनके लिए यह एक नया आयाम खुल सकता है।
इस तरह का कदम अनौपचारिक उधारदाताओं (pawn brokers, informal money-lenders) की भूमिका को कम कर सकता है और चुनिंदा समूहों को बैंकिंग प्रणाली में जोड़ने में मदद कर सकता है।
जोखिम और सावधानी
हालाँकि, चांदी पर लोन देना जोखिम-रहित नहीं है — चूंकि चांदी का मूल्य उतार-चढ़ाव अनुभव करता है और बाजार में लिक्विडिटी सोने की तुलना में कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने इसलिए सीमा-नियंत्रण (10 kg, 500 g) और LTV श्रेणियाँ निर्धारित की हैं ताकि बैंक का जोखिम नियंत्रित रहे।
ग्रामीण-शहरी समन्वय
ग्रामीण इलाकों में अक्सर सोने के बजाय चांदी की पारंपरिक संभाल होती है — क्योंकि चांदी कम मूल्य की, फिर भी मूल्यवान संपत्ति है। इस तरह से यह बदलाव स्थानीय अर्थव्यवस्था को राहत दे सकता है, नकदी प्रवाह को बढ़ा सकता है और स्थानीय व्यवसायों को मदद कर सकता है।

किन बातों का रखें ध्यान?
- इस सुविधा का प्रारंभ 1 अप्रैल 2026 से होगा।
- गिरवी की चांदी का वास्तविक स्वामित्व होना चाहिए — यदि मालिकाना अधिकार स्पष्ट नहीं होगा तो लोन नहीं मिलेगा।
- लोन लेते समय बैंक की फीस, रिटर्न/निलामी प्रक्रिया, बीमा एवं रखरखाव शुल्क आदि समझना महत्वपूर्ण है।
- चूंकि चांदी की कीमत में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकते हैं, इसलिए समय-समय पर मूल्यांकन और विलंब शुल्क आदि की जानकारी लेना जरूरी है।
- बैंक की पॉलिसी, शाखा अनुभव, ग्राहक-सेवा आदि देखें — क्योंकि अनुभव (Experience) और विश्वसनीयता (Trust) इस तरह के लोन में प्रासंगिक हैं।
निष्कर्ष
“loan against silver RBI rules” की घोषणा बैंकिंग जगत में एक स्पष्ट संकेत है — कि अब चांदी को सिर्फ पारम्परिक संपत्ति नहीं, बल्कि नकदी में बदलने योग्य संसाधन के रूप में देखा जाएगा। यह कदम न सिर्फ वित्त-समावेशन की दिशा में आगे बढ़ने का है, बल्कि धातुधारित गिरवी लोन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी व भरोसेमंद बनाने का भी है।
अगर आप चांदी के आभूषण या सिक्के रखते हैं और कभी तत्काल नकदी की जरूरत पड़ती है — तो इस सुविधा को समझना और तैयार रहना फायदेमंद होगा। लेकिन, जैसा कि किसी भी वित्तीय निर्णय में होता है, शर्त-शुल्क, प्रक्रिया व बैंक-पॉलिसी को ध्यान से समझना बेहद जरूरी है।
(FAQ)
Q1. क्या चांदी के बार्स या चांदी-ETFs भी इस लोन के लिए गिरवी रख सकते हैं?
उत्तर: नहीं। RBI के नए निर्देशों के अनुसार, सिर्फ चांदी के आभूषण, गहने या सिक्के ही गिरवी के रूप में स्वीकार होंगे — चांदी के बार्स, सलाखें या चांदी आधारित वित्तीय उत्पाद (ETFs/Mutual Funds) इस सुविधा के दायरे में नहीं आएंगे।
Q2. अगर मैंने चांदी पर लोन लिया और पूरी राशि चुका दी, तो बैंक कितने दिन में चांदी वापस करेगा?
उत्तर: बैंक या वित्तीय संस्था को लोन पूरी तरह चुकाए जाने के बाद 7 कार्यदिवस (working days) के भीतर गिरवी चांदी को लौटाना होगा। यदि देरी होती है, तो बैंक को ₹5,000 प्रति दिन तक का जुर्माना देना होगा।
Q3. अगर मैं चांदी पर लोन लेता हूँ और चुकता नहीं कर पाता, तो क्या होगा?
उत्तर: चुकता नहीं कर पाने पर बैंक पूर्व-सूचना के बाद गिरवी चांदी की नीलामी कर सकता है। उसमें न्यूनतम आरक्षित मूल्य वर्तमान मूल्य का 90 % होगा। यदि दो बार नीलामी विफल हुई, तो यह सीमा 85 % तक कम हो सकती है।
Q4. क्या चांदी पर लोन लेने के लिए मेरी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी होनी चाहिए?
उत्तर: छोटे लोन (उदाहरण के लिए ₹2.5 लाख तक) के मामले में बैंक क्रेडिट हिस्ट्री कम कड़े रूप से देख सकते हैं। नए निर्देशों में कहा गया है कि इस श्रेणी में “लोन-टू-वैल्यू” अनुपात 85 % तक है, और प्रक्रिया आसान हो सकती है।
Q5. इस सुविधा का क्या प्रमुख लाभ और क्या जोखिम हो सकते हैं?
उत्तर: मुख्य लाभ यह है कि चांदी रखने वाले परिवार अब इस संपत्ति को सुरक्षित गिरवी के रूप में उपयोग कर सकेंगे, जिससे वित्तीय आवश्यकता के समय नकदी प्राप्त हो सकेगी। जोखिम के रूप में चांदी की कीमत में उतार-चढ़ाव, बैंक की पॉलिसी व फीस-शुल्क की जटिलता, और गिरवी रखरखाव की जिम्मेदारियाँ शामिल हैं।
Other Links
Income Tax New Rule
8th Pay Commission
Delhi Water Bill Waiver Scheme



