दिल्ली में मात्र ₹5 में मिलेगा भरपेट भोजन: 25 दिसंबर से शुरू होगी ‘अटल कैंटीन’ योजना | Delhi Atal Canteen Rs 5 Meal

दिल्ली की अटल कैंटीन Atal Canteen Rs 5 meal योजना में जरूरतमंदों को मात्र पांच रुपये में पौष्टिक गरम भोजन मिलता हुआ दृश्य

Atal Canteen Rs 5 meal — दिल्ली में मात्र ₹5 में मिलेगा भरपेट भोजन, 25 दिसंबर से शुरू होने जा रही ‘अटल कैंटीन’ योजना

परिचय 

दिल्ली में जल्द ही ऐसा कदम उठाया जा रहा है जो हजारों जरूरतमंदों के लिए भोजन की चिंता को काफी हद तक खत्म कर देगा। दिल्ली सरकार ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि राजधानी में ‘अटल कैंटीन’ (Atal Canteen Rs 5 meal) नाम से एक नई जनकल्याणकारी योजना शुरू की जा रही है, जिसके तहत नागरिकों को मात्र ₹5 में पौष्टिक और भरपेट भोजन मिलेगा। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती 25 दिसंबर से लागू की जा रही है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा 15 अगस्त के भाषण में इसका जिक्र किया गया था, और अब इसकी पुष्टि एक विस्तृत क्रियान्वयन योजना के साथ हो चुकी है। राजधानी के 100 चयनित स्थानों पर पहले चरण में अटल कैंटीनें संचालित होंगी, जिनमें प्रतिदिन सुबह और शाम दो बार भोजन परोसा जाएगा।

यह योजना न केवल गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि दिल्ली में बढ़ती खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) की समस्या को भी कम करेगी।


मुख्य रिपोर्ट 

दिल्ली में लंबे समय से ऐसी योजना की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जो कम आमदनी वाले परिवारों, प्रवासी मजदूरों, रिक्शा चालकों, निर्माण श्रमिकों, फुटपाथ विक्रेताओं और दैनिक वेतनभोगियों को सस्ती और सम्मानजनक दर पर भोजन उपलब्ध कराए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘अटल कैंटीन’ (Atal Canteen Rs 5 meal) की शुरुआत की जा रही है।

विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों—जैसे NDTV, Hindustan Times, Times of India और Economic Times—ने इस बात की पुष्टि की है कि दिल्ली सरकार 100 स्थानों पर यह सुविधा शुरू करेगी, जहां दाल-चावल, सब्ज़ी, रोटी जैसे भोजन उपलब्ध होंगे।


दिल्ली की Atal Canteen Rs 5 meal योजना में स्वच्छ रसोई में दाल चावल और रोटी की पौष्टिक थाली तैयार की जा रही है
Atal Canteen Rs 5 meal परियोजना के तहत स्वच्छ रसोई में रोज़ाना हजारों जरूरतमंदों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार किया जाता है

योजना की शुरुआत: 25 दिसंबर को पहला चरण

दिल्ली सरकार इस योजना को 25 दिसंबर, जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है, उसके अवसर पर शुरू कर रही है।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में 100 स्थानों पर यह सेवा शुरू होगी और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे विस्तारित किया जाएगा।

सरकार ने इसके लिए अपने बजट में लगभग ₹100 करोड़ का प्रावधान पहले ही कर दिया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, भोजन तैयार करने, वितरण, मॉनिटरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया जाएगा।


क्या मिलेगा ₹5 में?

New Indian Express के अनुसार, प्रतिदिन दो समय भोजन उपलब्ध होगा। हर केंद्र में:

  • सुबह लगभग 500 प्लेट भोजन
  • शाम को 500 प्लेट भोजन

मतलब एक कैंटीन में रोज़ करीब 1000 भोजन उपलब्ध कराए जाएंगे।

मेनू में शामिल होंगे:
दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी — पोषण संतुलन को ध्यान में रखते हुए


डिजिटल टोकन और CCTV व्यवस्था

यह योजना सिर्फ सस्ती नहीं बल्कि पारदर्शी भी होगी।

Hindustan Times के अनुसार, हर कैंटीन में:

  • डिजिटल टोकन सिस्टम
  • CCTV निगरानी
  • डिजिटल रिकॉर्डिंग ऑफ मील सर्व्ड

लागू की जाएगी, जिससे खाद्य वितरण पारदर्शी और न्यायसंगत रहेगा।


कौन होंगे मुख्य लाभार्थी?

विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में हर दिन लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें नियमित भोजन प्राप्त करने में कठिनाई होती है, विशेषकर:

  • प्रवासी श्रमिक
  • निर्माण मजदूर
  • रिक्शा/ई-रिक्शा चालक
  • हॉकर
  • कम आय वाले परिवार
  • बुजुर्ग और बेसहारा लोग
  • छात्र

‘अटल कैंटीन’ योजना इन सभी को सीधा लाभ पहुंचाएगी और सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगी।


विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की राय

खाद्य नीति विशेषज्ञ डॉ. मनीषा देव का बयान:

“दिल्ली जैसी महानगर में खाद्य असुरक्षा एक बड़ी समस्या है। ऐसे में ₹5 का भोजन न केवल भूख को कम करेगा, बल्कि गरीबों को गरिमा के साथ भोजन प्राप्त करने का अधिकार भी देगा। यह एक सराहनीय कदम है, बशर्ते कि इसकी गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए।”

अर्थशास्त्री प्रोफेसर राजीव कालरा का विश्लेषण:

“₹5 में भोजन देना आर्थिक रूप से तभी टिकाऊ हो सकता है जब सरकार पर्याप्त सब्सिडी दे और बेहतर प्रबंधन हो। यदि दिल्ली सरकार इसे प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो यह देशभर में एक मॉडल बन सकता है।”


योजना की चुनौतियाँ — विशेषज्ञ विश्लेषण

हालांकि योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन विशेषज्ञ इसके सामने आने वाली संभावित चुनौतियों की ओर भी इशारा कर रहे हैं:

1. वित्तीय स्थायित्व

₹5 में भोजन देना बहुत कम लागत है। वास्तविक लागत प्रति प्लेट ₹25–₹35 पड़ सकती है।
इसे बने रहने के लिए भारी सब्सिडी की आवश्यकता होगी।

2. गुणवत्ता नियंत्रण

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, पोषण मानक और सामग्री की ताजगी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक होगा।

3. संचालन और आपूर्ति प्रबंधन

रेगुलर सप्लाई चेन, किचन प्रबंधन, कर्मचारियों की उपलब्धता और मॉनिटरिंग इस योजना की सफलता तय करेंगे।

4. लाभार्थी तक सही पहुँच

कई योजनाएँ गलत हाथों में चली जाती हैं। डिजिटल टोकन सिस्टम इस समस्या को कम कर सकता है, लेकिन ग्राउंड-लेवल मॉनिटरिंग भी उतनी ही जरूरी है।


दिल्ली में भूख की स्थिति — क्या डेटा कहता है?

विभिन्न राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के अनुसार:

  • दिल्ली में लगभग 16% निम्न-आय वाले परिवार रोजाना पर्याप्त भोजन नहीं प्राप्त कर पाते।
  • लगभग 28% प्रवासी श्रमिक बताते हैं कि उन्हें प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं होता।
  • बड़ी संख्या में लोग सड़क पर अस्वस्थ, अस्वच्छ भोजन पर निर्भर रहते हैं।

इस योजना से इस समस्या में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।


Atal Canteen Rs 5 meal योजना में डिजिटल टोकन व्यवस्था के माध्यम से लोगों को पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से भोजन वितरण होता है
दिल्ली की Atal Canteen Rs 5 meal योजना में डिजिटल टोकन सिस्टम लागू किया गया है जिससे भोजन वितरण में पारदर्शिता और व्यवस्था सुनिश्चित रहती है

क्रियान्वयन मॉडल — कैसे काम करेगी ‘अटल कैंटीन’?

योजना का पूरा मॉडल इस प्रकार होगा:

  • केंद्रों का संचालन: सरकार और पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाएँ मिलकर चलाएंगी
  • टोकन प्रणाली: पहले आओ पहले पाओ
  • केंद्रों का चयन: अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों, मजदूर वर्ग वाले इलाकों और बस/मेट्रो स्टेशनों के पास
  • प्रति केंद्र भोजन सीमा: 1000 भोजन प्रतिदिन
  • भुगतान प्रणाली: डिजिटल और नकद दोनों

‘अटल कैंटीन’ क्यों महत्वपूर्ण? — एक सामाजिक पहल का अर्थ

दिल्ली जैसे महानगर में गरीबी और महंगाई दोनों तेजी से बढ़े हैं। रोज़ की दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों के लिए बाहर भोजन करना अब आसान नहीं। ₹50–₹70 की एक बेसिक थाली बहुतों की पहुंच से बाहर है।

‘अटल कैंटीन’:

  • गरीबों की जेब पर बोझ कम करेगी
  • स्वस्थ भोजन उपलब्ध कराएगी
  • जीवन स्तर में सुधार करेगी
  • भूख और कुपोषण को कम करेगी
  • सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेगी

निष्कर्ष 

‘अटल कैंटीन’ योजना दिल्ली सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी पहलों में से एक है। यदि इसे सही प्रबंधन, पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमित मॉनिटरिंग के साथ लागू किया गया, तो यह दिल्ली में भूख और खाद्य असुरक्षा की चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है।

यह योजना न केवल आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करेगी, बल्कि दिल्ली को एक ऐसे मॉडल शहर के रूप में स्थापित कर सकती है जहां सरकार अपनी जनता की भोजन की जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाती है।

‘अटल कैंटीन’ शुरू होने के बाद इसके प्रभाव का आकलन करना और इसे बेहतर बनाना भी महत्वपूर्ण होगा। यदि योजना सफल होती है, तो यह देशभर में एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।


FAQ 

1. ‘अटल कैंटीन’ योजना कब शुरू होगी?

योजना का पहला चरण 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर शुरू होगा।

2. एक प्लेट भोजन की कीमत कितनी होगी?

हर व्यक्ति को सिर्फ ₹5 में भरपेट भोजन मिलेगा।

3. दिल्ली में कितनी ‘अटल कैंटीन’ खुलेंगी?

पहले चरण में 100 कैंटीन खोली जा रही हैं, बाद में संख्या बढ़ाई जाएगी।

4. कैंटीन में कौन-सा भोजन मिलेगा?

दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी — पौष्टिक और संतुलित भोजन की व्यवस्था होगी।

5. क्या यह योजना केवल गरीबों के लिए है?

योजना मुख्य रूप से निम्न-आय वर्ग के लोगों के लिए है, लेकिन कोई भी नागरिक निर्धारित मूल्य पर भोजन ले सकता है।


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