Tata Electronics ROHM Partnership: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की नई क्रांति

Tata Electronics and Merck Deal

Tata Electronics ROHM semiconductor partnership: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए रणनीतिक करार

 

Tata Electronics ROHM partnership भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया है। भारतीय तकनीकी परिदृश्य में आज से जुड़े इस नए अध्याय ने वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला, घरेलू विनिर्माण क्षमता, और ‘Make in India’ पहल को नई दिशा दी है। जापान की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनी ROHM Co., Ltd. और भारत के Tata Electronics के बीच यह साझेदारी इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने के भारत सरकार के लक्ष्य के अनुरूप है।


परिचय: Tata Electronics और ROHM का साझेदारी करार

भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी उद्योग के रूप में उभर रहा है। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Tata Electronics और ROHM Co., Ltd. ने आज एक विस्तृत और रणनीतिक करार पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण, असेंबली और टेस्टिंग भारत में करना है।

यह साझेदारी भारत में पावर सेमीकंडक्टर्स और ऑटोमोटिव-ग्रेड MOSFETs जैसे अत्याधुनिक चिप्स के निर्माण के लिए एक व्यापक विनिर्माण ढांचा स्थापित करेगी।


Tata Electronics ROHM semiconductor partnership का विस्तृत विश्लेषण

1. साझेदारी का उद्देश्य

इस सहयोग का प्राथमिक लक्ष्य है भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता का विकास करना और वैश्विक बाजारों के लिए पावर सेमीकंडक्टर चिप्स बनाना। इसके लिए ROHM के तकनीकी अनुभव को Tata Electronics की विधानसभा और टेस्टिंग विशेषज्ञता के साथ जोड़ा गया है।

संयुक्त बयान में बताया गया है कि शुरुआत में Tata Electronics ROHM के इंडिया-डिज़ाइंड ऑटोमोटिव-ग्रेड Nch 100V, 300A Silicon MOSFET को एक विशेष TOLL पैकेज में असेंबल और टेस्ट करेगा, और अगले वर्ष तक बड़ा उत्पादन शुरू करने की योजना है।


2. भारत के लिए बड़ा अवसर

यह कदम न सिर्फ घरेलू सर्किटों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि भारत को एक वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारतीय सरकार के ‘Make in India’ और ‘Designed in India, Manufactured in India’ के लक्ष्य के अनुरूप यह सहयोग देश में डिज़ाइन, विकास और निर्माण तीनों को एक ही ढांचे में लाने का अवसर प्रदान करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस साझेदारी से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता में वृद्धि होगी, जिससे देश को विदेशी चिप निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।


3. सरकारी नीतियों और निवेश के प्रभाव

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग में भारी निवेश को बढ़ावा दिया है, जिसमें 10 से अधिक सेमीकंडक्टर संयंत्रों को मंजूरी दी गई है, और फैब्रिकेशन व पैकेजिंग/टेस्टिंग सुविधाओं दोनों के विकास पर जोर दिया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि Tata Electronics ROHM semiconductor partnership के माध्यम से भारत की राजस्व वृद्धि, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लक्ष्यों को भी बल मिलेगा। विनिर्माण गतिविधियों में नई तकनीकों के समावेश से भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में सुधार होगा।

Tata Electronics ROHM partnership के तहत भारत में ऑटोमोटिव सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण शुरू, मेक इन इंडिया को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
Tata Electronics ROHM partnership के तहत भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण किया जाएगा, जिससे देश की इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को नया रूप मिलेगा।

4. विशेषज्ञों की राय और बयान

इस साझेदारी के महत्व को लेकर विशेषज्ञों ने सकारात्मक टिप्पणी की है:

डॉ. रणधीρ ठाकुर, Tata Electronics के CEO एवं MD ने कहा है कि यह सहयोग न केवल भारतीय बाजार बल्कि ग्लोबल मार्केट के लिए भी उन्नत चिप पैकेजिंग क्षमताएँ प्रदान करेगा, जिससे चिप निर्माण की गुणवत्ता और विश्वास सुनिश्चित होगा।

कजुहिदे इनो, ROHM के बोर्ड सदस्य और प्रबंध कार्यकारी अधिकारी ने साझा बयान में कहा कि इस साझेदारी से स्थिर और क्षेत्र-आधारित सप्लाई चेन नेटवर्क का निर्माण होगा और घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी प्रवेश सुनिश्चित होगा।


5. भारत की सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में योगदान

यह निर्णय भारत की सेमीकंडक्टर नीति और OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) क्षेत्र के महत्व को और पुष्ट करता है। इंडिया में Jagiroad, Assam में Tata Semiconductor Assembly and Test जैसी सुविधाएँ पहले से ही योजना के तहत तैयार हैं, जिनके लिए ₹27,000 करोड़ से अधिक का निवेश अधिसूचित है और 48 मिलियन चिप्स प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता का लक्ष्य है।

भारत की सेमीकंडक्टर क्षेत्र में इन प्रयासों से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा तकनीकी कौशल का विकास होगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धाशीलता बढ़ेगी।


Tata Electronics ROHM semiconductor partnership के प्रभाव

इस साझेदारी से न सिर्फ भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग बल्कि ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और आईटी क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव आएंगे। यह एक ऐसा कदम है जो देश को आधुनिक तकनीकी ढांचे में प्रतिस्पर्धी बनाएगा और वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में नई भूमिका देगा।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत के पास तकनीकी और उत्पादन कौशल का मिश्रण है, और इस तरह की सहयोगात्मक पहल देश को टेक्नोलॉजी नवाचार और निर्यात वृद्धि के नए मार्ग प्रदान करेगी।


निष्कर्ष: भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य की दिशा में बड़ा कदम

आज के समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, Tata Electronics ROHM semiconductor partnership भारत के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम है। यह साझेदारी ‘Made in India’ और ‘Designed in India’ की अवधारणाओं को साकार करती है और वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में भारत को एक मजबूत स्थिति प्रदान करती है।

यह साझेदारी न सिर्फ तुरंत फायदे देगी बल्कि दीर्घकालिक तकनीकी और आर्थिक विकास के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगी। भारत अब न सिर्फ सॉफ्टवेयर बल्कि हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में भी अपनी पहचान बना रहा है — और यह साझेदारी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।


FAQ 

प्रश्न 1: Tata Electronics ROHM semiconductor partnership का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह साझेदारी भारत में पावर सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण, असेंबली और टेस्टिंग करने के लिए बनाई गई है, जिससे देश की विनिर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़े।

प्रश्न 2: ROHM क्या भूमिका निभाएगा?
उत्तर: ROHM अपनी अग्रणी डिवाइस टेक्नोलॉजी प्रदान करेगा और Tata Electronics के साथ मिलकर उच्च गुणवत्ता वाले सेमीकंडक्टर उत्पाद भारत और वैश्विक बाजारों के लिए विकसित करेगा।

प्रश्न 3: यह साझेदारी भारत की तकनीकी नीति पर कैसे प्रभाव डालती है?
उत्तर: यह सहयोग भारत की ‘Make in India’ पहल तथा ‘Designed in India, Manufactured in India’ विज़न को मजबूत करता है और तकनीकी प्रगति में देश की भूमिका को बढ़ावा देता है।

प्रश्न 4: क्या यह साझेदारी वैश्विक बाजार पर प्रभाव डालेगी?
उत्तर: हां, इस साझेदारी से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में निवेश और विश्वसनीयता के साथ अहम भूमिका निभा सकता है।

प्रश्न 5: इस परियोजना से रोजगार और विकास को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इस साझेदारी से नए रोजगार के अवसर, कौशल विकास और क्षेत्रीय आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और यह भारत के तकनीकी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाएगी।


Other Links

Vodafone Idea Share

ICICI AMC Share Price Today

Apollo Micro Systems Share Price Target 2030