ITC share price drop: सिगरेट पर उत्पाद शुल्क वृद्धि से निवेशक चिंतित
ITC share price drop: आज भारतीय शेयर बाजार में ITC लिमिटेड (ITC Ltd.) की शेयर कीमत में एक महत्वपूर्ण गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट उस समय आई जब सरकार ने सिगरेट पर नए उत्पाद शुल्क को लागू करने की घोषणा की। इस फैसले के बाद से निवेशकों के बीच चिंताएँ बढ़ गई हैं और बाजार ने तेज प्रतिक्रिया दी है।
सरकार का निर्णय और बाजार की प्रतिक्रिया
आज, 1 जनवरी 2026, ITC लिमिटेड के शेयरों में लगभग 8% की गिरावट देखी गई। इस गिरावट का प्रमुख कारण सरकार द्वारा सिगरेट पर नए उत्पाद शुल्क में वृद्धि की घोषणा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वृद्धि 1 फरवरी 2026 से लागू होगी और इस फैसले का असर सीधे ITC जैसे सिगरेट उत्पादकों पर पड़ेगा। नई नीति के तहत, सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी को और बढ़ा दिया गया है, जिससे इस उत्पाद के निर्माण और विक्रय की लागत में वृद्धि हो सकती है।
इसकी वजह से ITC के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों का मानना है कि इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से सिगरेट बिक्री के मोर्चे पर।
आज का शेयर मूल्य: क्या असर पड़ा?
- ITC के शेयर की कीमत: ₹364–₹370 (जनवरी 1, 2026)
- अंतिम बंद मूल्य: ₹403 (दिसंबर 2025)
- 52 हफ्ते का उच्चतम मूल्य: ₹491.00
- 52 हफ्ते का न्यूनतम मूल्य: ₹362.70 (आज के दिन की कीमत)
नौकरी और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में कंपनी के विविधीकरण के बावजूद, सिगरेट की बिक्री ITC के लिए एक बड़ा राजस्व स्रोत है। ऐसे में उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है।
कंपनी का विविधीकरण: क्या निवेशकों को राहत मिलेगी?
ITC केवल सिगरेट उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एफएमसीजी (FMCG), पेपरबोर्ड, होटल और कृषि क्षेत्र में भी विविधीकृत है। हालांकि, सिगरेट के व्यापार में वृद्धि की उम्मीदें अब कमजोर हो सकती हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में कंपनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, FMCG के कारोबार में कंपनी की हिस्सेदारी बढ़ रही है, और इसके उत्पाद जैसे बिस्कुट, स्नैक्स और सौंदर्य उत्पाद बाजार में काफी लोकप्रिय हैं।

ITC के शेयरों में गिरावट के कारण
1. उत्पाद शुल्क में वृद्धि:
यह वृद्धि भारतीय सरकार द्वारा स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने और सिगरेट की खपत को कम करने के उद्देश्य से की गई है। इसके बावजूद, इससे ITC जैसी कंपनियों के लिए दबाव बढ़ सकता है क्योंकि उनकी सिगरेट की बिक्री में कमी आने की संभावना है।
2. बाजार का अनिश्चित माहौल:
उत्पाद शुल्क में वृद्धि के अलावा, वैश्विक स्तर पर भी व्यापारिक माहौल काफी अनिश्चित बना हुआ है। निवेशकों के बीच चिंताएँ हैं कि यह बदलाव भारतीय उपभोक्ता बाजार को प्रभावित कर सकता है और इसके असर से निवेशकों का विश्वास कमजोर हो सकता है।
3. वित्तीय दबाव:
ITC की पिछले कुछ महीनों में वित्तीय स्थिति मजबूत रही है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्पाद शुल्क में वृद्धि की वजह से भविष्य में उनके मुनाफे में कमी आ सकती है, जो कि निवेशकों को चिंता में डाल सकता है।
Public Awaaz Business Desk का विश्लेषण:
यह गिरावट न केवल सिगरेट व्यवसाय पर, बल्कि ITC के अन्य क्षेत्रीय व्यापारों पर भी असर डाल सकती है। हालांकि, ITC का FMCG और अन्य क्षेत्रीय कारोबार अपेक्षाकृत मजबूत है, फिर भी सिगरेट पर नए शुल्क के कारण जोखिम हो सकता है, फिर भी FMCG क्षेत्र में ITC का प्रदर्शन मजबूत है।
जोखिम संबंधित अस्वीकरण (Risk Disclaimer)
यह लेख किसी प्रकार का वित्तीय सलाह नहीं है। इसमें उल्लिखित जानकारी और विश्लेषण केवल सामान्य जानकारी के रूप में प्रदान किया गया है और निवेश निर्णय लेने के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। निवेश से जुड़े निर्णयों के लिए कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
FAQs
1. Q: क्या ITC के शेयर में गिरावट एक लंबी अवधि के लिए होगी?
A: यह निर्भर करता है कि कंपनी अपने विविधीकरण और अन्य कारोबारों से किस हद तक राजस्व प्राप्त करती है। सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि के बाद, लंबी अवधि में इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा।
2. Q: क्या सरकार की नीति से ITC के वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ेगा?
A: हाँ, सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि से ITC के सिगरेट कारोबार पर नकारात्मक असर हो सकता है, जो कंपनी के कुल मुनाफे पर प्रभाव डाल सकता है।
3. Q: क्या निवेशकों को ITC के शेयर में निवेश करना चाहिए?
A: निवेशक ITC के कारोबार की विविधता को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश निर्णय लें। हालांकि, सिगरेट पर नए शुल्क के कारण जोखिम हो सकता है, फिर भी FMCG क्षेत्र में ITC का प्रदर्शन मजबूत है।
4. Q: क्या ITC के शेयरों में और गिरावट हो सकती है?
A: रिपोर्ट्स के अनुसार, सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि का असर ITC के शेयरों पर पड़ सकता है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में कंपनी की स्थिति को देखते हुए इसका असर पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।



