Noida Jungle Trail Park — कबाड़ को बनाया गया वंडर: Waste-to-Wonder पार्क की पूरी कहानी
Noida Jungle Trail Park — यह नाम अब जल्द ही दिल्ली-एनसीआर के वीकेंड वीक-गेटअवे को एक नया आयाम देने वाला है। शहर के शोर-शराबे, मॉल-मूवी-डाइनिंग रूटीन से अलग, यह पार्क एक नया, पर्यावरण-सचेत, और परिवार-मंडल केंद्रित विकल्प दिखाता है। 500 टन से अधिक कबाड़ — पुरानी गाड़ियों के हिस्से, धातु रॉड, फ्यूल-टैंकों, मशीनरी के टूटे-फूटे पुर्जों आदि — को कला में बदलकर, इस पार्क ने वेस्ट-मैटीरियल को वंडर बना दिया है।
आज हम आपको इस पार्क की पूरी जानकारी देंगे — क्या है खास, कब खुलेगा, किस तरह से बना है, और किसके लिए है यह।

🌍 Waste-to-Wonder: कबाड़ से कला तक — पार्क की अवधारणा और निर्माण
जब आप सुनते हैं “जंगल सफारी” या “वाइल्डलाइफ पार्क”, तो दिमाग में सचमुच के जानवर, पेड़-पौधे, जंगल की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण आता है। लेकिन यह पार्क उन पारंपरिक उम्मीदों को पलट देता है। यहाँ, “वन्यजीव” का अर्थ जीवित जानवर नहीं, बल्कि धातु, स्क्रैप, और पुनर्नवीनीकरण सामग्रियों से बनाई गई मूर्तियाँ है — जो आकार, रूप, और अनुभव में जीवन-सदृश हैं।
निर्माण में लगभग 500 टन स्क्रैप मटीरियल उपयोग हुआ है। इन संसाधनों में पुराने वाहन पार्ट्स, मशीनरी के टूटे हिस्से, फ्यूल-टैंक, बोल्ट-नट, लोहे की रॉड आदि शामिल हैं। इन सबका उपयोग करके हाथी, शेर, जिराफ, बाघ, कंगारू, डायनासोर, पक्षियों समेत 700-800 से अधिक जीवन-सदृश प्रतिमाएं (sculptures) बनाई गई हैं।
इसके अलावा पार्क में बेंच, गज़ेबो, लाइट फिक्स्चर आदि भी पुनर्नवीनीकृत धातु से बनाए गए हैं — ताकि समूचे पार्क का वातावरण स्थायी (sustainable) और पर्यावरण-अनुकूल रहे।
पार्क के निर्माण का अनुमानित खर्च है ₹22 करोड़। यह प्रोजेक्ट एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल में, Noida Authority तथा एक निजी कंपनी Z‑Tech के सहयोग से विकसित किया गया है।
“हमने यह पार्क सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनाया — इसका मकसद लोगों को दिखाना है कि कबाड़ भी कला बन सकता है, वेस्ट भी वंडर बन सकता है,” बताते हैं Z-Tech के एक वरिष्ठ अधिकारी।
📌 लोकेशन, आकार, ज़ोनिंग — पार्क की संरचना
Noida Jungle Trail Park नोएडा के सेक्टर 94 में, यमुना नदी के किनारे, नोएडा-दिल्ली-फरीदाबाद सीमा के पास स्थित है।
पार्क का कुल विस्तार लगभग 18.3 एकड़ बताया गया है — हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स 20 एकड़ तक भी इसे बताते हैं। अलग-अलग पारिस्थितिक (eco-habitat) अनुभव दिए जा सकें।
- पहला ज़ोन (लगभग 4 एकड़) — एंट्री प्लाज़ा, पार्किंग (300 वाहनों तक की), 1000 सीटों वाला एंफीथिएटर, फूड कोर्ट, प्रदर्शनी क्षेत्र आदि होगा।
- दूसरा ज़ोन (लगभग 8.8 एकड़) — जिसमें उष्णकटिबंधीय जंगल, रेगिस्तान, घास के मैदान, दलदली भूमि आदि शामिल होंगे। इस ज़ोन में प्राकृतिक दृश्य (jungle, savanna, grassland, wetlands) का पुनर्निर्माण किया गया है।
- तीसरा ज़ोन (~5.5 एकड़) — जो कि ओखला बर्ड सेंचुरी की ओर है, उसमें आइलैंड, महासागर, भूमध्य स्वरूप, और ध्रुवीय (polar) क्षेत्र जैसे समुद्री, तटीय, और बर्फीले वातावरण का निर्माण किया गया है। फोटोग्राफी और अनोखे अनुभव के लिए यह ज़ोन खास है।
इसके अतिरिक्त, पार्क में बच्चों के लिए खेल-मैदान, पिकनिक स्पॉट, आउटडोर बैठने की व्यवस्था, स्मृति-दुकानें (souvenir shops), कैफे/फूड कोर्ट, आराम-जगहें और वॉकवे शामिल हैं।
🕒 उद्घाटन, ट्रायल रन और आगंतुकों के लिए जानकारी
इस पार्क का ट्रायल रन 25 जून 2025 से शुरू हुआ था।
हालाँकि, सार्वजनिक उद्घाटन कुछ देरी के बाद तय हुआ — अब पार्क की आधिकारिक शुरुआत 25 सितंबर 2025 को हो रही है। इसे उसी दिन जनता के लिए खोला जाएगा, जब UP के CM Yogi Adityanath भी उद्घाटन करेंगे, ऐसी जानकारी मीडिया में आई है।
पार्क मुख्य रूप से वीकेंड-गेटअवे, परिवार-पर्यटन, बच्चों की outing, फ़ोटो-सेशन और पर्यावरण-जागरूकता के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
प्रवेश और शुल्क
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्क में एंट्री शुल्क लगभग ₹100 अनुमानित है। इसके अतिरिक्त, यदि आप एडवेंचर एक्टिविटीज (जैसे ज़िपलाइन, हाई-रोप्स आदि) करना चाहते हैं, तो उन पर अलग शुल्क हो सकता है।
मेट्रो द्वारा आना चाहें तो नजदीकी स्टेशन है सेक्टर 94 मेट्रो स्टेशन — वहाँ से ऑटो / ई-रिक्शा द्वारा पार्क गेट तक सुविधा होगी। पार्क में पार्किंग भी उपलब्ध होगी।
🎨 पर्यावरण, शिक्षा और कलात्मकता — सिर्फ मनोरंजन से आगे
Noida Jungle Trail सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं — यह एक संदेश भी है।
♻️ रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबिलिटी
500 टन स्क्रैप मटीरियल का पुनर्चक्रण — यह बताता है कि कबाड़ को त्यागने या landfill तक पहुंचने के बजाय, उसे पुनर्नवीनीकृत कर शक्तिशाली आवाज दी जा सकती है। वे लोग जो पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन या सस्टेनेबल लाइफस्टाइल में भरोसा रखते हैं, उनके लिए यह पार्क प्रेरणा का स्रोत है।
यह एक तरह की “लाइव प्रदर्शनी” है कि कैसे औद्योगिक वेस्ट — जिसे हम कचरा समझते हैं — को कला, शिक्षा, और मनोरंजन में बदला जा सकता है।
👪 परिवार-मंडल एवं बच्चों के लिए अनुभव
बच्चों को जानवरों, जंगल, डायनासोर आदि का पर्यावरण दिखाना आज के समय में मुश्किल हो सकता है — लेकिन Jungle Trail की धातु प्रतिमाएं उन्हें यह अनुभव दे सकती हैं। इसके अलावा, आउटडोर खेल, झलकियाँ, फोटो-सेशन, पिकनिक — सब कुछ जो एक परिवार को चाहिए।
स्कूल-ट्रिप, दोस्तों के साथ वीकेंड प्लान, या फोटोशूट — इस पार्क में ये विकल्प मौजूद हैं।
📸 फोटोग्राफी और सोशल मीडिया के लिए अनुकूल
लोहे की बनावट, स्क्रैप की रूक्षता, और थिएम्ड जोन — ये सब मिलकर पारंपरिक पार्कों से अलग अनुभव देते हैं। दिन हो या रात — जब LED लाइटिंग के साथ ये मूर्तियाँ जग उठती हैं, तो तस्वीरें (insta-worthy photos) लेना मुश्किल नहीं।
Z-Tech की वाइस-प्रेसीडेंट कहती हैं, “हर मूर्ति, हर लाइट, हर बेंच — हमने इसे इस तरह बनाया कि यह सिर्फ देखने नहीं, महसूस करने लायक हो।”

📰 निष्कर्ष
Noida Jungle Trail Park — कई मायनों में एक नया प्रयोग है। यह पारंपरिक मनोरंजन स्थलों से अलग है, पर्यावरण-सचेत है, कला और डिजाइन को महत्व देता है, और परिवारों तथा बच्चों के लिए अच्छा विकल्प है।
लेकिन, कुछ संभावित चुनौतियाँ और उम्मीदें दोनों बनी हुई हैं:
- हालांकि स्क्रैप मटीरियल कलात्मक है, लेकिन यह “वास्तविक जंगल” या “जिंदगी वाले जानवर” जैसा अनुभव नहीं दे सकता — इसलिए जो लोग असली वन्यजीव सफारी की उम्मीद रखते हों, उन्हें यह पार्क अलग अनुभव देगा।
- इसके अलावा, भीड़ प्रबंधन, सफाई, सुरक्षा, पार्किंग आदि की तैयारी महत्वपूर्ण होगी — खासकर वीकेंड और छुट्टी के दिन।
- मौसम, धुआं-धूल, ट्रैफिक आदि जैसी चुनौतियाँ भी हो सकती हैं — लेकिन अच्छी प्लानिंग और पार्क की व्यवस्थाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
अगर सब कुछ ठीक रहा, तो यह पार्क दिल्ली-एनसीआर के लिए एक नया स्थान बनेगा — जहाँ लोग सिर्फ आउटिंग क्यों नहीं करेंगे, बल्कि झरोखा देखेंगे कि कैसे इंसानी रचनात्मकता और पर्यावरण-जागरूकता मिलकर “कचरा” को “कलाकृति” बना सकती है।
❓ FAQ
Q1. Noida Jungle Trail Park कहां है और कैसे पहुंचा जा सकता है?
A: पार्क नोएडा के सेक्टर 94 में है, यमुना किनारे, नोएडा-दिल्ली-फरीदाबाद सीमा के पास। नजदीकी मेट्रो स्टेशन सेक्टर 94 है — वहाँ से ऑटो या ई-रिक्शा से पार्क गेट तक पहुँचना आसान है। निजी गाड़ियों के लिए पार्किंग की सुविधा भी है।
Q2. इस पार्क में क्या-क्या देखने को मिलेगा?
A: यहाँ 700–800 से अधिक जानवर, पक्षी और डायनासोर की धातु मूर्तियाँ होंगी — हाथी, शेर, जिराफ, बाघ, कंगारू, डायनासोर आदि, जो स्क्रैप मटीरियल से बने हैं। इसके अलावा थीम्ड ज़ोन (जंगल, रेगिस्तान, ध्रुवीय क्षेत्र, समुद्री क्षेत्र), फूड कोर्ट, पिकनिक स्पॉट, बच्चों के लिए खेल-मैदान, एंफीथिएटर, शो-एरिया आदि होंगे।
Q3. पार्क कब खुल रहा है और प्रवेश शुल्क कितना है?
A: ट्रायल रन 25 जून 2025 से शुरू हुआ था। सार्वजनिक उद्घाटन 25 सितंबर 2025 को हो रहा है। अनुमानित प्रवेश शुल्क ₹100 है — हालांकि एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए अलग शुल्क हो सकता है।
Q4. क्या यह पार्क सिर्फ मनोरंजन है या कुछ सीखने को भी मिलेगा?
A: यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है — यह रीसाइक्लिंग, पर्यावरण-सचेतना और सस्टेनेबल डिजाइन का प्रतीक है। यह दिखाता है कि कबाड़ (waste) भी कला और सुंदरता में कैसे बदल सकता है। बच्चों, छात्रों, पर्यावरण प्रेमियों, फोटोग्राफरों और परिवारों के लिए यह जागरूकता और अनुभव दोनों है।
Q5. वीकेंड या भीड़ के समय पार्क में क्या चुनौतियाँ हो सकती हैं?
A: अधिक भीड़, पार्किंग की कमी, सफाई-प्रबंधन, भीड़ प्रबंधन जैसी चुनौतियाँ हो सकती हैं। लेकिन अगर प्रशासन और पार्क प्रबंधन ठीक से काम करता है — पार्किंग, गाइडेड वॉक, सुरक्षा, वेस्ट मैनेजमेंट आदि — तो यह अनुभव सुखद बना रहेगा।
Other Links
Free Laptop Yojana 2025
DDA Housing Scheme
Black Friday Sale 2025



