Office Peacocking का यू-टर्न: क्यों कंपनियाँ निवेश कर रही हैं इस नए वर्कप्लेस ट्रेंड में
प्रस्तावना
Office Peacocking — यह जिस शब्द ने पिछले कुछ समय में कंपनियों के कार्यस्थल रणनीतियों में अचानक प्रमुखता पकड़ी है — दरअसल एक ऐसा ट्रेंड है जिसमें कंपनियाँ अपने कार्यालयों को आकर्षक, डिजाइन-सम्पन्न और सुविधाओं से भरपूर बना रही हैं, ताकि कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा के बाद फिर से ऑफिस आने के लिए प्रेरित किया जा सके।

Office Peacocking क्या है?
Office Peacocking शब्द में “Peacock” अर्थात मोर की तरह खिंचने-वाले पंखों का संकेत है: कंपनियाँ अपने कार्यालयों को इस तरह सजाती-संवारती हैं कि वो आकर्षित करें।
विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रेक्टिस में शामिल है: आधुनिक और आरामदायक लाउंज एरिया, कलात्मक फर्नीचर, पर्याप्त नेचुरल लाइट, स्टॉक पैंट्रीज, वेलनेस और वर्क-लाइफ सुविधाएँ आदि।
उदाहरण के लिए, Dentsu Global Services की एक्सपर्ट वयशाली मेहता कहती हैं:
“Office Peacocking refers to making the physical office an attractive destination—renovating workspaces with appealing enhancements and extravagant amenities—to encourage employees to return to office after prolonged remote work.”
इसी तरह, एक ब्लॉग के अनुसार:
“Office Peacocking involves employers enhancing the workplace with attractive features and amenities to bring employees back to the office.”
इस प्रकार, यहाँ दो पहलू सामने आते हैं:
- कंपनी द्वारा कार्यालय को इतना सुधारना कि कर्मचारी स्वेच्छा से आएँ।
- कर्मचारी द्वारा कार्यालय आना एक प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण से- जिसे कभी “coffee badging” के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन मुख्य रूप से यह पहला भाग है।
क्यों उठा यह ट्रेंड?
रिटर्न-टू-ऑफिस (RTO) का दबाव
महामारी-काल के बाद दूरस्थ (remote) और हाइब्रिड वर्क मॉडल का सिद्धांत तेजी से बढ़ा। कई कंपनियाँ घर-से-काम की सुविधा के कारण कार्यालय में उपस्थिति कम देख रही थीं। ऐसे में “ऑफिस क्यों आऊँ” की भावना सामने आई। इसे हल करने के लिए Office Peacocking एक रणनीति बनकर उभरा है।
टैलेंट प्रतिस्पर्धा एवं ब्रांडिंग
आज की प्रतिस्पर्धी नौकरी-बाजार में कंपनियाँ केवल वेतन या पोजीशन से नहीं बल्कि कार्य-पर्यावरण (workplace environment) से भी प्रतिभाओं को आकर्षित करना चाहती हैं। एक आकर्षक कार्यालय स्थल यह सिग्नल देता है कि कंपनी अपने कर्मचारियों का ख्याल रखती है।
कर्मचारी-अनुभव (Employee-experience) एवं वेल-बीइंग
कर्मचारी अब सिर्फ डेस्क-चालू काम नहीं चाहते हैं; वे ऐसे कार्यालय का अनुभव चाहते हैं जहाँ सहयोग, संबंध, आराम और कंपनी-संस्कृति महसूस हो। Office Peacocking इस उम्मीद को पूरा करने की दिशा में है।
भारत में स्थिति
भारत में, विभिन्न बड़ी-मध्यम कंपनियाँ इस ट्रेंड को अपनाने लगी हैं। उदाहरण के तौर पर, एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि:
“भारत की कंपनियाँ आकर्षक डिज़ाइन, ट्रेंडी फर्नीचर, कोज़ी कॉर्नर्स, प्राकृतिक प्रकाश, अटेंडेड पैंट्रीज आदि के साथ ‘Office Peacocking’ को अपना रही हैं।”
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में इस तरह की इन्वेस्टमेंट में 25-30 प्रतिशत वृद्धि देखी गई है और कंपनियाँ अपने कार्यालय बजट का लगभग 5-10 प्रतिशत हिस्से को इस दिशा में आवंटित कर रही हैं।
मेट्रो-शहर जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद इस ट्रेंड के अग्रणी हैं क्योंकि वहाँ बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियाँ और स्टार्ट-अप्स हैं।

Office Peacocking के लाभ
आर्कषक कार्य-स्थल
जब कार्यालय का वातावरण ऐसा हो जहाँ कर्मचारी काम करना चाहते हों—प्रेरित हों—तो उपस्थिति बढ़ सकती है। यह कंपनियों की दृष्टि से सकारात्मक है।
टीम-सहयोग एवं संवाद मेँ सुधार
सशक्त ऑफिस-स्पेस में आमने-सामने की मुलाकातें, टीम ब्रेनस्टॉर्मिंग, आकस्मिक संवाद बढ़ सकते हैं—जो हाइब्रिड/रेमोट सेट-अप में कम हो जाते थे।
कर्मचारी संतुष्टि एवं ब्रांडिंग
यदि कार्य-स्थल आकर्षक, आरामदायक और संस्कृति-उन्मुख हो तो यह कंपनी को एक बेहतर नियोक्ता (employer) ब्रांड बनाने में मदद करता है, जिससे टैलेंट आकर्षण और रिटेंशन बढ़ सकते हैं।
लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं
लागत-विवाद
इन मॉडर्न कार्य-स्थल निर्माण में महत्वपूर्ण निवेश लग सकता है। कंपनियों को यह ध्यान देना होगा कि यह निवेश वास्तव में रिटर्न-ऑन-इन्वेस्टमेंट (ROI) लाता है या नहीं।
दिखावा बन जाने का खतरा
यदि केवल कार्यालय का बाहरी रूप-रंग बदल दिया जाए, लेकिन कर्मचारियों की असल ज़रूरतें (लचीलापन, भूमिका-विकास, कार्य-स्वायत्तता) न पूरी हों—तो Office Peacocking सिर्फ एक “शोपीस” बनने का जोखिम लेती है।
लचीलापन पर समझौता?
कई कर्मचारी अब दूरस्थ या हाइब्रिड मॉडल को प्राथमिकता देते हैं। यदि ऑफिस आना मजबूरी बन जाए, तो यह कर्मचारियों में प्रतिकूलता उत्पन्न कर सकता है।
कार्य-प्रवाह एवं व्याकुलता
खुले एवं आकर्षक कार्य-स्थल में कभी-कभी ध्वनि, निजी स्वातंत्र्य (privacy) और ध्यान-भंग (distraction) जैसी समस्याएं सामने आती हैं, विशेषकर ओपन-प्लान ऑफिस मेँ। (उदाहरण के लिए, एक अध्ययन में २५ % अधिक “lack of privacy” को acoustic dissatisfaction से जोड़ा गया है)Office Peacocking काम कर रही है क्या?
बहुत-सी रिपोर्ट्स कहती हैं कि यह ट्रेंड पर्याप्त प्रभाव दिखा रही है, लेकिन केवल डिजाइन-अपग्रेड पर्याप्त नहीं हैं। उदाहरण के लिए:
- Owl Labs की स्टडी में यह पाया गया कि 62 % कर्मचारियों ने कहा कि यदि उन्हें “हाइब्रिड वर्क” की सुविधा मिल जाए तो वे वेतन में 10 % कटौती तक स्वीकार कर सकते हैं।
- दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है: “यह स्पष्ट है कि ऑफिस-ऑन नहीं लौटेंगे सिर्फ इनाम-फर्नीचर हुए देखकर” — यानी, ऑफिस Peacocking अकेले पर्याप्त नहीं।
तो, निष्कर्ष यह कि Office Peacocking सहायक हो सकती है, लेकिन इसे पूरी रणनीति के रूप में ही देखा जाना चाहिए—जिसमें लचीलापन, कार्य-स्वायत्तता, संस्कृति, तकनीक तथा कर्मचारी-अपेक्षाएँ शामिल हों।
विश्लेषण
Office Peacocking के पीछे मुख्य डायनामिक्स हैं: काम-काज परिवर्तन, कर्मचारी-अपेक्षाएं बदलना, कार्यस्थल और टैलेंट प्रतिस्पर्धा।
हाइब्रिड मॉडल की चुनौतियाँ
दूरस्थ/हाइब्रिड कार्य मॉडल ने कर्मचारियों को समय-सृजन (time-savings), यात्रा-मुक्ति, लचीलापन आदि दिए हैं। ऐसे में कार्यालय को सिर्फ “जहाँ जाना है” की जगह से “जहाँ जाना चाहिये” की जगह बनाना है। Office Peacocking इसी दिशा में एक प्रयास है।
मानव-केंद्रित डिज़ाइन
अच्छे कार्यस्थल अब सिर्फ डेस्क-कुर्सी नहीं बल्कि मानव-केंद्रीकरण (human-centric) की ओर बढ़ रहे हैं। बेहतर प्रकाश, एर्गोनॉमिक फर्नीचर, हरे पौधे, आराम-क्षेत्र, सामाजिक इंटरैक्शन स्पेस—ये सब मिलकर कर्मचारियों की भलाई और अनुभव को बेहतर बनाते हैं। (उदाहरण: biophilic design)
ब्रांड एवं टैलेंट रणनीति
अच्छा कार्यालय अनुभव न सिर्फ वर्तमान कर्मचारियों में संतुष्टि लाता है, बल्कि नए उम्मीदवारों को आकर्षित करने में भी मदद करता है। इस तरह Office Peacocking को टैलेंट मार्केटिंग टूल के रूप में देखा जा रहा है।
मापन एवं बाधाएँ
हालाँकि इन उपायों के लाभ देखे जा रहे हैं, लेकिन मापन करना मुश्किल है कि कितना ऑफिस Peacocking ने उपस्थिति, प्रोडक्टिविटी, रिटेंशन में सुधार किया है। इसके अलावा, डिजाइन-अपग्रेड की महँगी लागत, व्यापक बदलाव की ज़रूरत, और कर्मचारियों की विविध अपेक्षाएँ एक चुनौती हैं।
निष्कर्ष
Office Peacocking एक प्रभावशाली ट्रेंड है, जिसने आधुनिक कार्यस्थल रणनीति को नया रूप दिया है। भारत समेत विश्व-भर की कंपनियाँ इस दिशा में कदम उठा रही हैं। लेकिन इस ट्रेंड को “अक्सर युवाओं का आकर्षित स्टाइल” समझना पर्याप्त नहीं होगा। वास्तविक सफलता तब मिलेगी जब यह डिजाइन-उपाय कर्मचारी-अपेक्षाओं, लचीलापन, सहयोग-संस्कृति, प्रौद्योगिकी और कार्य-स्वायत्तता के साथ मेल खाएँ।
कंपनियों को सुझाव है कि ऐसे उपाय करें:
- कर्मचारियों से संवाद करें कि उन्हें कार्यालय में आकर किससे लाभ होगा।
- डिजाइन-बदलाव सिर्फ दिखावा न हों; उन्हें वास्तविक काम-अनुभव को बेहतर बनाना चाहिए।
- लागत-लाभ का विश्लेषण करें, छोटे बजट कंपनी भी क्रिएटिव लेकिन अर्थपूर्ण बदलाव कर सकती हैं।
- लचीलापन बिल्कुल छोड़ें नहीं — हाइब्रिड मॉडल को भी समाहित करें।
यदि इस तरह से लिया गया, तो Office Peacocking ट्रेंड न सिर्फ एक फैशन बनेगा बल्कि एक स्थायी रणनीति बन सकता है — जिससे कर्मचारी न सिर्फ आएँ बल्कि आना चाहें।
FAQ
Q1: Office Peacocking कितनी कारगर है वास्तव में?
A1: यह ट्रेंड कर्मचारियों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है लेकिन अकेले डिजाइन-अपग्रेड से काम नहीं चलने वाला। कर्मचारी वर्क-फ्लेक्सिबिलिटी, कार्य-स्वायत्तता और कंपनी-संस्कृति भी चाहते हैं।
Q2: भारत में कितना खर्च देखा जा रहा है इस ट्रेंड में?
A2: भारत में कंपनियाँ अपने कार्यालय बजट का लगभग 5-10 % हिस्सा Office Peacocking के लिए आवंटित कर रही हैं, और इस तरह की इन्वेस्टमेंट में 25-30 % वृद्धि देखी गई है।
Q3: क्या यह ट्रेंड सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित है?
A3: नहीं, लेकिन बड़ी कंपनियों में यह अधिक देखा गया है क्योंकि उनके पास बजट और संसाधन मौजूद हैं। छोटे-मध्यम कंपनियाँ भी बजट-अनुकूल उपाय अपना सकती हैं।
Q4: Office Peacocking को अपनाते समय किन बातों का ध्यान देना चाहिए?
A4: डिजाइन के साथ-साथ, कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों का सर्वे करें, कार्य-स्वायत्तता सुनिश्चित करें, निवेश-लाभ का आकलन करें और लचीलापन बनाए रखें।
Q5: क्या भविष्य में यह ट्रेंड टिकेगा?
A5: संभवतः हाँ, लेकिन जैसे-जैसे वर्क-मॉडल और कर्मचारी-अपेक्षाएँ बदलेंगी, Office Peacocking को और भी सहायक रणनीति के रूप में देखा जाएगा, न कि सिर्फ दिखावे के लिए।



