RBI Minimum Balance Rules: बचत खाते के न्यूनतम बैलेंस पर RBI के दिशानिर्देश और ग्राहकों के अधिकारों की पूरी सच्चाई
प्रस्तावना
RBI minimum balance rules को लेकर सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर लगातार तरह‑तरह के दावे सामने आते रहे हैं—कहीं कहा जाता है कि RBI ने बचत खातों के लिए नया न्यूनतम बैलेंस तय कर दिया है, तो कहीं दावा किया जाता है कि सभी बैंकों में एक समान न्यूनतम बैलेंस लागू कर दिया गया है। लेकिन हकीकत क्या है? क्या भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वास्तव में कोई नया नियम जारी किया है? क्या ग्राहकों को अब अधिक बैलेंस रखना अनिवार्य है?

RBI Minimum Balance Rules: नए नियमों की वास्तविक सच्चाई क्या है?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) तय करना बैंकों का अधिकार है, न कि RBI का। खुद RBI ने अपनी आधिकारिक FAQ में कहा है कि:
“RBI ने बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस के लिए कोई दिशा‑निर्देश जारी नहीं किए हैं; यह बैंकों द्वारा तय किया जाता है।”
इसका मतलब यह है कि—
RBI पूरे देश के लिए एक समान न्यूनतम बैलेंस नहीं तय करता। हर बैंक अपने आर्थिक मॉडल, लागत, सुविधाओं और नीतियों के अनुसार न्यूनतम बैलेंस तय करता है।
2025 में भी RBI ने इस बात को दोहराया कि बैंक खुद अपने न्यूनतम बैलेंस नियम बनाते हैं और “उनके पास अपने मिनिमम बैलेंस चार्ज तय करने की स्वतंत्रता है।”
इसलिए जो दावे इंटरनेट पर चल रहे हैं कि RBI ने “नया ₹5,000 या ₹10,000 न्यूनतम बैलेंस अनिवार्य कर दिया”, वे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
RBI के वास्तविक मौजूदा नियम: न्यूनतम बैलेंस ‘तय’ नहीं, लेकिन ‘पेनल्टी’ पर सख्त गाइडलाइन
हालाँकि RBI minimum balance rules के रूप में RBI न्यूनतम बैलेंस की रकम तय नहीं करता, परंतु वह यह नियंत्रित करता है कि बैंक न्यूनतम बैलेंस न रखने पर क्या शुल्क वसूल सकते हैं।
RBI की मुख्य गाइडलाइंस:
RBI ने 2014 के बाद से पेनल्टी से संबंधित विस्तृत नियम बनाए हैं जिनमें कहा गया है कि बैंक पेनल्टी तभी लगाए जब:
- ग्राहक को पहले से पूरी जानकारी दी जाए
बैंक को ग्राहकों को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि उनके खाते में न्यूनतम कितना बैलेंस आवश्यक है और न रखने पर कितना शुल्क लगेगा। - किसी बदलाव से पहले कम से कम एक महीने की पूर्व सूचना दी जाए
यानी बैंक अचानक चार्ज नहीं बढ़ा सकता। - पेनल्टी उचित और ‘प्रपोर्शनेट’ (proportionate) हो
यदि ग्राहक ने ₹1,000 की कमी रखी है तो बैंक ₹1,000 की पेनल्टी नहीं लगा सकता। पेनल्टी का आकार “शॉर्टफॉल” के अनुसार होना चाहिए। - सिर्फ पेनल्टी की वजह से खाता ‘नेगेटिव बैलेंस’ में नहीं जा सकता
यानी यदि खाते में ₹0 है, बैंक पेनल्टी काटकर खाते को –₹200 में नहीं ले जा सकता। - इनऑपरेटिव खातों पर कोई पेनल्टी नहीं लगेगी
RBI ने साफ कहा है कि इनऑपरेटिव खातों—जिनमें 2 साल से कोई लेन-देन नहीं है—पर बैंक न्यूनतम बैलेंस की पेनल्टी नहीं काट सकते।
ये नियम ग्राहक‑हित संरक्षण (Consumer Protection) के तहत बनाए गए थे और 2024–2025 में कई बार फिर से मीडिया में प्रमुखता से चर्चित हुए।
क्यों बढ़ा भ्रम? कई बैंकों ने 2024–2025 में अपने न्यूनतम बैलेंस बढ़ाए
RBI minimum balance rules को लेकर भ्रम इसलिए भी बढ़ा क्योंकि कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले दो वर्षों में अपने Minimum Average Balance (MAB) बढ़ाए हैं।
उदाहरण के तौर पर—ICICI बैंक ने 2024–2025 में अपने कुछ शहरी खातों के लिए न्यूनतम बैलेंस बढ़ाया, जिसके बाद ग्राहकों में यह भ्रम पैदा हुआ कि “RBI ने नया नियम लागू किया है।”
लेकिन RBI ने स्वयं स्पष्ट किया कि यह बैंक‑स्तरीय निर्णय है, न कि RBI द्वारा जारी कोई नया अनिवार्य नियम।
RBI Minimum Balance Rules और इनऑपरेटिव अकाउंट: 2024–2025 में सबसे बड़ी राहत
2024–2025 में RBI की सबसे चर्चित गाइडलाइन इनऑपरेटिव खातों को लेकर थी। RBI ने फिर से जोर देकर कहा कि:
इनऑपरेटिव खातों में न्यूनतम बैलेंस के अभाव में पेनल्टी नहीं लगेगी और खाते को सक्रिय करने का कोई शुल्क नहीं देना होगा।
RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि:
“इनऑपरेटिव खाते को एक्टिवेट करना मुफ्त होगा और बैंक इसमें प्राप्त ब्याज को बिना शुल्क काटे जमा करेंगे।”
Times of India की रिपोर्ट ने भी इसे प्रमुखता से छापा कि—
“No minimum balance charges on inoperative accounts: RBI”
यह गाइडलाइन लाखों लोगों को राहत देती है, क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में बैंक खाते लंबी अवधि के लिए इनऑपरेटिव हो जाते हैं।
भारत में कितने खाते इनऑपरेटिव हैं? RBI के आंकड़ों से खुलासा
RBI की रिपोर्ट के अनुसार देश में ₹78,213 करोड़ से अधिक अनक्लेम्ड रकम (Unclaimed Deposits) बैंक खातों में पड़ी हुई है।
2025 में RBI ने इस राशि में से ₹67,270 करोड़ लौटाने का विशेष अभियान शुरू किया।
इनमें से अधिकांश खाते 10 साल से अधिक समय से इनऑपरेटिव हैं। ➤ इन खातों पर पेनल्टी नहीं लग सकती—यह नियम करोड़ों ग्राहकों के हित में है।
क्या ग्राहक का खाता ‘नेगेटिव बैलेंस’ में जा सकता है? विशेषज्ञों ने क्या कहा
Economic Times की रिपोर्ट में बैंकिंग विशेषज्ञों ने बताया कि यदि ग्राहक न्यूनतम बैलेंस नहीं रखता, तो बैंक पेनल्टी काट सकते हैं, परंतु “खाता सिर्फ पेनल्टी की वजह से नेगेटिव नहीं होना चाहिए।”
यदि खाता शून्य है, बैंक पेनल्टी तुरंत नहीं काट सकता। जब ग्राहक अगली बार पैसा जमा करेगा, तब बैंक पेंडिंग पेनल्टी वसूल सकता है—लेकिन यह पूरी तरह RBI की ‘प्रपोर्शनेट पेनल्टी’ नीति के अनुरूप होना चाहिए।
बचत खाता खोलते समय बैंक क्या बताएंगे? RBI की पारदर्शिता नीति
RBI minimum balance rules के अंतर्गत ग्राहक‑पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। बैंक को निम्न जानकारी लिखित रूप से ग्राहक को देनी होती है:
- न्यूनतम बैलेंस कितना है
- इसे न रखने पर बैंक कितना शुल्क लगाएगा
- खाते के प्रकार के अनुसार सुविधाएँ और मुफ्त लेन-देन की संख्या
- जल्दबाज़ी में किए गए बदलावों पर एक महीने की पूर्व सूचना
RBI ने इसे बैंकिंग ग्राहक के अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा घोषित किया है।
BSBDA और Small Accounts: जहाँ न्यूनतम बैलेंस शून्य है
RBI minimum balance rules का सबसे बड़ा अपवाद Basic Savings Bank Deposit Account (BSBDA) है। इस खाते में:
- कोई न्यूनतम बैलेंस नहीं
- सीमित मुफ्त लेन-देन
- रूपे कार्ड सुविधा
- खाता खोलने का शुल्क नहीं
BSBDA वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने का माध्यम है। करोड़ों लोग इस खाते का लाभ उठा रहे हैं, विशेष रूप से ग्रामीण और कम आय वर्ग के ग्राहक।

क्या वाकई कोई नया नियम आया है? 2024–2025 की स्थिति का निष्कर्ष
2024–2025 में RBI ने नए नियम जारी करने के बजाय पुराने नियमों को दोहराया, स्पष्ट किया और लागू करने पर जोर दिया। देश में जारी गलतफहमियों के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि:
- RBI ने कोई नया एकसमान न्यूनतम बैलेंस लागू नहीं किया है।
- न्यूनतम बैलेंस का निर्णय बैंक लेते हैं।
- RBI केवल पेनल्टी और ग्राहक संरक्षण के नियम तय करता है।
- इनऑपरेटिव खातों पर कोई भी पेनल्टी नहीं लगेगी।
- खातों को एक्टिवेट करना मुफ्त है।
- पेनल्टी ‘प्रपोर्शनेट’ होगी और खाता नेगेटिव में नहीं जाएगा।
RBI minimum balance rules की सच्चाई यही है कि नियम ग्राहक के अधिकारों को सुरक्षित रखते हैं और बैंकों की मनमानी रोकने के लिए बनाए गए हैं।
निष्कर्ष
RBI minimum balance rules को लेकर चल रहे भ्रम के बीच यह समझना आवश्यक है कि RBI का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को पारदर्शी, सुगम और ग्राहक‑हितैषी बनाना है। न्यूनतम बैलेंस तय करने की स्वतंत्रता बैंकों के पास है, लेकिन पेनल्टी और ग्राहक अधिकारों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी RBI निभाता है।
इंटरनेट पर फैल रहे दावों के विपरीत, RBI ने कोई ऐसा नियम जारी नहीं किया है जिससे सभी खातों में एक समान न्यूनतम बैलेंस अनिवार्य हो जाए। इसके बजाय उन्होंने ग्राहक सुरक्षा से जुड़े नियमों को मजबूत किया है, विशेष रूप से इनऑपरेटिव खाते, पेनल्टी नीति और पारदर्शिता के संदर्भ में।
यह रिपोर्ट पाठकों को तथ्यात्मक, सटीक और आधिकारिक जानकारी प्रदान करती है, ताकि वे अफवाहों से बचें और अपने अधिकारों को समझकर बैंकिंग निर्णय ले सकें।
FAQ:
प्रश्न 1: क्या RBI ने नया न्यूनतम बैलेंस अनिवार्य कर दिया है?
उत्तर: नहीं। RBI ने कोई नया न्यूनतम बैलेंस तय नहीं किया है। बैंक स्वयं तय करते हैं कि उनके ग्राहकों को कितना न्यूनतम बैलेंस रखना होगा।
प्रश्न 2: क्या न्यूनतम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी लग सकती है?
उत्तर: हाँ, लेकिन केवल तभी जब बैंक ने पहले से स्पष्ट जानकारी दी हो और पेनल्टी ‘प्रपोर्शनेट’ हो।
प्रश्न 3: क्या इनऑपरेटिव खातों पर पेनल्टी लगती है?
उत्तर: नहीं। इनऑपरेटिव खातों पर किसी भी प्रकार की न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी नहीं लग सकती।
प्रश्न 4: क्या खाता नेगेटिव बैलेंस में जा सकता है?
उत्तर: नहीं। केवल पेनल्टी की वजह से बैंक खाते को नेगेटिव बैलेंस में नहीं ले जा सकते।
प्रश्न 5: क्या BSBDA खाते में न्यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य है?
उत्तर: नहीं। BSBDA एक ‘जीरो बैलेंस’ खाता होता है और इसमें न्यूनतम बैलेंस की कोई आवश्यकता नहीं है।



